भारत में खेती की बढ़ती लागत और अधिक उत्पादन की चाह में किसान बड़ी मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं। इनमें DAP (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) सबसे लोकप्रिय उर्वरकों में से एक है। लेकिन हाल ही में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, देश के अधिकांश किसान DAP की सही मात्रा और उपयोग की जानकारी नहीं रखते, जिससे मिट्टी की सेहत और फसल उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

खेतों में DAP का बढ़ता उपयोग बना खतरा! 91% किसानों को नहीं पता सही मात्रा, जानें विशेषज्ञों की सलाह


विशेषज्ञों का कहना है कि DAP का जरूरत से ज्यादा उपयोग मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बिगाड़ देता है। इससे फसलों की गुणवत्ता घट सकती है और लंबे समय में भूमि की उर्वरता कम हो सकती है।


DAP का अधिक उपयोग क्यों है चिंता का विषय?

DAP में फास्फोरस और नाइट्रोजन की मात्रा अधिक होती है। यदि किसान बिना मिट्टी परीक्षण के इसका उपयोग करते हैं, तो मिट्टी में अन्य आवश्यक पोषक तत्वों जैसे जिंक, सल्फर और पोटाश की कमी हो सकती है।


अधिक DAP उपयोग से होने वाले नुकसान

●मिट्टी की उर्वरता में गिरावट

●सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी

●फसल उत्पादन में कमी

●खेती की लागत में वृद्धि

●पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव

●किसानों को क्या करना चाहिए?

●विशेषज्ञ किसानों को सलाह देते हैं कि वे:

●मिट्टी परीक्षण अवश्य कराएं।

●संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाएं।

●जैविक कम्पोस्ट का उपयोग बढ़ाएं।

●कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार उर्वरक डालें।

●फसल की आवश्यकता के अनुसार ही DAP का प्रयोग करें।


संतुलित उर्वरक उपयोग ही समाधान

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल DAP पर निर्भर रहने के बजाय किसानों को NPK, जैविक खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग करना चाहिए। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और लंबे समय तक बेहतर उत्पादन मिलता है।


निष्कर्ष

DAP खेती के लिए महत्वपूर्ण उर्वरक है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग फसल और मिट्टी दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। किसानों को सही मात्रा और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए ताकि उत्पादन बढ़े और भूमि की उर्वरता भी बनी रहे।