दुनिया भर में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. कई देशों में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन भारत सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए बड़ा भरोसा दिलाया है, केंद्र सरकार के अनुसार देश में पर्याप्त मात्रा में कच्चे तेल, गैस और एलपीजी का भंडार मौजूद है, जिससे आने वाले समय में लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा,

 
केंद्र सरकार (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) का कहना है कि देश को ऊर्जा संकट और आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए "त्याग" और संयम की आवश्यकता है।

ईंधन की खपत में कटौती: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ईंधन आपूर्ति में आ रही बाधाओं को देखते हुए, पीएम ने नागरिकों से पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करने और सार्वजनिक परिवहन (मेट्रो) का उपयोग करने की अपील की है,

सोना और विदेश यात्रा से परहेज: विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए नागरिकों से एक साल तक अनावश्यक सोना न खरीदने और विदेश यात्राओं या विदेशों में डेस्टिनेशन वेडिंग से बचने को कहा गया है, इसे देशभक्ति से जोड़ा गया है



सरकार का कहना है कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियां रोजाना लगभग 1000 करोड़ रुपये तक का नुकसान सह रही हैं, ताकि आम लोगों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ न पड़े। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत के पास करीब 60 दिनों का कच्चे तेल और गैस का स्टॉक मौजूद है, इसके अलावा LPG का लगभग 45 दिनों का भंडार सुरक्षित रखा गया है, ऐसे में लोगों को घबराने या पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगाने की कोई जरूरत नहीं है, सरकार ने कहा कि देश में ईंधन की सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है 


विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव, युद्ध और उत्पादन में कटौती की वजह से तेल की कीमतों में तेजी आई है, यदि ईंधन की कीमतों में अचानक भारी वृद्धि होती है तो इसका असर हर क्षेत्र पर पड़ता है, ऐसे में सरकार का यह कदम लोगों के लिए भरोसे और स्थिरता का संदेश माना जा रहा है,
आने वाले समय में यदि वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं, तब भी भारत अपने सुरक्षित भंडार और मजबूत सप्लाई सिस्टम के दम पर स्थिति को संभालने की तैयारी में जुटा हुआ है,